Tuesday, 7 February 2023

मेरा गांव तेरा शहर

मेरा गांव तेरा शहर

 


ये शहर बहुत अजीब हैं तुझे पता हैं क्या
खो गया था मैं  यहां तुझे  खबर हैं  क्या

यहां   की  हवा मेरे गाँव के  जैसी नही हैं
फिर   तेरा इस  शहर में कुछ रखा हैं क्या

चल गांव बुलाता हैं तुझे पुकारती हैं तुझे माँ
वो कच्ची छते प्यारे प्यारे लोग यहां हैं क्या

तू सिर्फ तन्हा हैं यहां तेरा अपना कोई नही
तेरे सब गांव में हैं तुझे याद करते हैं तुझे वहां

जब से शहर आया हूं मैं घूट सा रहा हूं 
बता मुझे यहां की हवा जहरीली हैं क्या 

मैं रातभर सड़क पर था सब अलग दिखा मुझे
ना गांव की रिवायतें ना बुज़ुर्गों की पंचायत हैं यहां

बेशक़ यहां ऊँची ऊँची इमारतें बड़े बड़े किले हैं
लेकिन मेरे गांव के जैसे खुले घर यहां हैं कहां

इस शहर में पेड़ पौधे और फुलवारियां भी हैं
मगर इन पेड़ पौधों की ठण्डी हवा हैं कहां

ये शहर तुझे मुबारक हो मैं चला यहां से
एक दिन आएगा तू लौटकर यहां से वहां

लिखना तो अभी बहुत कुछ चाहता था मैं
लेकिन तेरे शहर पर लिखने के लिए हैं भी क्या 

Write by zishan alam


 

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मेरा गांव तेरा शहर

मेरा गांव तेरा शहर   ये शहर बहुत अजीब हैं तुझे पता हैं क्या खो गया था मैं  यहां तुझे  खबर हैं  क्या यहां   की  हवा मेरे गाँव के  जैसी नही है...